Subscribe Us

header ads

बिश्नोई समाज का तेईसवां नियम (अमर रखावै) भावार्थ सहित || Explaintion of Twenty third rule of Bishnoi society

बिश्नोई समाज का तेईसवां नियम (अमर रखावै) भावार्थ सहित || Explaintion of Twenty third rule of Bishnoi society

.

मादा भेड़ बकरीयों का समूह तो इकट्ठा रह सकता है और लोग ऊन,दूध आदि के लिए पालते भी हैं किन्तु नर भेड़ या बकरा साथ में अधिक नहीं रह पाते जिससे उनको लोग कसाईयों कोदेते हैं। कसाई लोग उनकी हत्या कर देते हैं। उस समय भेड़ बकरी पालन करना ही लोगों का प्रमुख धंधा था। इस प्रकार से सैकड़ों बकरे कसाईयों के हाथ में पहुँच कर कट जाते थे। इतनी अधिक मात्रा में जीव हत्या देखकर जम्भेश्वरजी ने यह धर्म नियम बनाया था कि प्रथम तो बिश्नोई होकर भेड़
बकरी पालन करना ही छोड़ दो और यदि अति शीघ्र न छोड़ सको तो धीरे-धीरे कम करते-करते अपने आप ही छूट जाएगी। तब उस समय यह समस्या आ गई कि इन बकरों का क्या करें। जम्भेश्वर भगवान ने कहा कि इनको कसाईयों के हाथों न बेचो। यदि भेड़ों मेंइनको नहीं रख सकते तो इनका थाट बना दीजिए, जिसमें केवल बकरें ही रहेंगे। ये अमर ही रहेंगे अर्थात इनको कोई नहीं मारेगा। स्वतः ही अपनी मृत्यु से मर जायेंगे तो धीरे-धीरे अपने आप तुम्हारा भेड़ बकरीयों से पीछा छूट जायेगा। फिर कभी उन्हें पालना नहीं,यदि तुम्हें पशु पालन करना है तो गौपालन करो, तुम्हें अभूतमय दूध देगी। इस प्रकार से उन परिस्थितियों में इस धर्म नियम को बनाया था। जब धीरे-धीरे वे परिस्थितियाँ समाप्त हो गयी, बिश्नोईयों ने भेड़- बकरी पालन ही छोड़ दिया तो फिर थाट पालन करने का क्या औचित्य रह जाता है। किसी निरीह प्राणी की कसाईयों के हाथों से रक्षा करना कोई बुरी बात तो नहीं कही जा सकती। यदि थाट पालने का सामर्थ्य हो तो ऐसा भी कर सकते हैं। उतने जीवों की रक्षा हो सकेगी किन्तु यह नियम प्रत्येक बिश्नोई के लिए अनिवार्य रूप से पालन करने योग्य नहीं है। इसी वजह से अगर रखावें थाट यह परम्परा प्रायः खत्म हो चुकी है। अब केवल रोटू गांव में ही इस परम्परा का पालन हो रहा है।


साभार: जम्भसागर
लेखक: आचार्य कृष्णानन्द जी
प्रकाशक: जाम्भाणी साहित्य अकादमी 




टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां