OMG : ऑटो की छत पर उगा बाजरा, जाने क्या किया ऑटो मालिक ने

 OMG : ऑटो की छत पर उगा बाजरा, जाने क्या किया ऑटो मालिक ने

OMG : ऑटो की छत पर उगा बाजरा, जाने क्या किया ऑटो मालिक ने


हमने अक्सर देखा है थार के मरुस्थल में बसे अंतिम छोर के गांव जहां सुविधाओं का अभाव है। बिजली पानी की व्यवस्थाएं नहीं है। फिर भी लोग आरामदायक जीवन जीते हैं लेकिन कैसे? अक्सर कहा जाता है आवश्यकता, आविष्कार की जननी है। यहां के लोग जुगाड़ू पद्धति में माहिर रहे हैं। पानी के संचय और पर्यावरण संरक्षण में इनका कोई सानी नहीं। आप सोच रहे होंगे इस ऑटो‌ के फोटो का मरुस्थल के लोगों से क्या संबंध है। संबंध है यहां के लोगों के पास गर्मी से बचने के लिए कूलर, ऐसी तो नहीं लेकिन इनके द्वारा लगाए गए हरियल  दखखत/पेड़ अवश्य है जो खर्च‌ रहित‌ ही नहीं बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी है। ऐसी ही कहानी है छत पर बाजरा लगे इस ऑटो की।

आप देख सकते कि कैसे इस ऑटो की छत पर बाजरा और मक्का के पौधे लगे हुए हैं। इस ऑटो के संचालक का नाम महेंद्र है जो बिहार के रहने वाले है और पिछले 25 वर्षों से दिल्ली में ऑटो चला रहे हैं।

गर्मियों के दिनों में गर्मी ना लगे ऐसा तो हो नहीं सकता भले वह दिलवालों की दिल्ली हो या राजस्थान का थार। गर्मी से बचने के लिए महेंद्र गर्मियों में अपने ऑटो की छत पर एक गीला कालीन रखते थे। लेकिन गर्मी से बचाव और ऑटो की ठंड बरकरार रखने के लिए समय-समय पर वह इसपर पर पानी छिड़क दें रहते थे। इसके पीछे उनकी सोच यह होती थी कि ऑटो ठंडा रहेगा, तो ग्राहक भी अधिक आएंगे। लेकिन गीला कालीन गर्मी से बचाने के लिए पर्याप्त राहत नहीं दे पा रहा था।

इससे निजात पाने की सोचने लगे एक दिन इनके दिमाग में वही मरुथल की जुगाड़ पद्धति का आगाज हुआ और उन्होंने सोचा क्यों ने वोटों की छत पर घास उगाई जाए? उन्होंने इसे आजमाया और परिणाम यह हुआ कि उनके ऑटो की छत पर बाजरे की फसल उग आई।

आज जब उनका ऑटो दिल्ली की सड़कों पर दौड़ता है, तो लोग मुस्कुराते हुए उनका स्वागत करते हैं। अधिकांश यात्री इस कदम की सराहना करते हैं और ऑटो के साथ तस्वीरें लेते हैं। पिछले आठ महीने से यह कारवां ऐसे ही चल रहा है। महेंद्र कहते हैं कि यह अब ऐसा ही रहेगा, इससे उन्हें राहत और खुशी दोनों मिलती है।

अगर आप भी दिल्ली में रहते हैं तो कभी न कभी महेंद्र के ऑटो में सवारी कीजिए और इस ग्रीन ऑटो (GreenAuto) के सुनहरे सफर का आनंद लेकर अपना अनुभव दूसरों के साथ साझा कीजिए ताकि इस हरित प्रयास की शोंधी खुशबू दूर तक फैले।

मूल लेख स्त्रोत : अजय यादव साभार

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