पर्यावरण संरक्षण के लिए आम जन को प्रेरित कर रहे सहायक वन संंरक्षक : जगदीश सहारण

पर्यावरण संरक्षण के लिए आम जन को प्रेरित कर रहे सहायक वन संंरक्षक : जगदीश सहारण

वन विभाग में सेवारत रहते हुए लगावाए सर्वाधिक खेजड़ी के वृक्ष, लोगों को अधिकाधिक पौधे लगाने के लिए कर रहे है जागरुक।। 

ACF JAGDISH SAHARAN

हनुमानगढ़पर्यावरण संरक्षण के लिए वे हमेशा आमजन को प्रेरित करते रहते हैं। इनका प्रयास रहता है कि विभाग जितने परिपक्व पेड़ों का कटान करे, उससे कहीं अधिक पौधे लगाए जाए ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।  

समय-समय पर ये किसानों को भी पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करते है। इनका प्रयास रहता है कि ज्यादा से ज्यादा खेजड़ी के पौधे लगाए जाए। जी, हां हम बात कर रहे हैं वन विभाग के टिब्बी क्षेत्र में  Range Officer GR I (अतिरिक्त कार्यप्रभारी ACF{सहायक वन संंरक्षक}) पद पर तैनात पर्यावरणप्रेमी जगदीश सहारण कि। श्री सहारण वन विभाग में सेवारत रहते हुए आमजन को अधिकाधिक पौधे लगाने के लिए जागरुक कर रहे हैं। वन विभाग में इनकी कर्मठ, परिश्रमी व इमानदार रेंजर के रूप में होती है। 

जगदीश सहारण का जन्म १३ सितम्बर १९६३ को संगरिया में हुआ। सेकेण्डरी तहलका शिक्षा इन्होंने ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया से अर्जित की। स्नातक जैन कॉलेज, बीकानेर से की। इसके पश्चात पीजी राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से की। पढ़ाई पुरी होते ही १५ अप्रैल १९८५ में इनका चयन वन विभाग में वनपाल के पद पर हुआ। प्रथम नियुक्ति सूरतगढ़ में हुई। १९८७ में इनका स्थानातरण बीकानेर हो गया।  यहां लगन एवं निष्ठा से कार्य करने के कारण इनको कार्यप्रभारी रेंजर का प्रभार सौंपा गया।  

वर्ष २००४ से २०१४ तक ये उपवन संरक्षक कार्यालय बीकानेर में कार्यप्रभारी रेंजर के पद पर सेवारत रहे। यहां इनके पास अपनी रेंज के अलावा अन्य रेंज का कार्यभार रहा । वर्ष २०१४ में इनका रेंजर के पद पर प्रमोशन हो गया।  इसी के साथ इनका स्तानातरण टिब्बी रेंज के मसितवाली क्षेत्र में हो गया। अपनी रेंज में ये पूर्ण लगन व निष्ठा से कार्य करते हुए आगे बढ़ रहे हैं व वर्तमान में रेंजर से Ist Grade रेंजर का पदभार ग्रहण करते हुए ACF का अतिरिक्त कार्यभार संभाला है।

जगदीश सहारण के पास वर्तमान में नोहर व भादरा रेंज का अतिरिक्त चार्ज है। वन विभाग में पोस्टिंग से लेकर अबतक आप विभिन्न किस्मों के पेड़ लगा चुके हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या खेजड़ी के वृक्षों की है।  नहरों पर कहीं भी पौधे रोपण किया जाता है तो वे कृषि भूमि की साइड में खेजड़ी के ही पौधे लगाते हैं। आमजन को भी आप पौधों का महत्व बताते हुए ज्यादा पौधे लगाने का संदेश देते हैं। पौधारोपण के बारे में चर्चा करते हुए जगदीश सहारण कहते है कि दिनोंदिन पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इसकी रोकथाम के लिए प्रत्येक व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि श्री गुरु जाम्भोजी ने भी पौधारोपण का संदेश दिया था। समाज के हर व्यक्ति को सद्गुरु जाम्भोजी के परम संदेश को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। 


खेजड़ी के नाम से है प्रसिद्ध खेत 


 जगदीश सहारण व इनके भाइयों कि बीकानेर जिले के ग्राम भूरासर की रोही में १५० बिघा भूमि है।  इस भूमि में इन्होनें २००० खेजड़ी के वृक्ष लगाए।  जो आज छायादार पेड़ बन चुके हैं। इस भूमि की पहचान भी खेजड़ी वाला खेत के रूप में होती है। आसपास के किसान अपने खेत की लोकेशन खेजड़लाळो खेत के पास ही बताते है । इस संबंध श्री सहारण बताते है कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि श्री गुरु जाम्भोजी के संदेश के अनुसार सर्वाधिक खेजड़ी के वृक्ष लगवाये जाए। अब तक इनके कार्यकाल में लाखों वृक्ष लगाए जा चुके हैं। 



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