मानद वन्यजीव प्रतिपालक अमृतादेवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार से सम्मानित श्री मोखराम धारणियां

 मानद वन्यजीव प्रतिपालक अमृतादेवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार से सम्मानित श्री मोखराम  धारणियां 

अमृतादेवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार से सम्मानित श्री मोखराम  धारणियां


विश्नोई समाज में जीव रक्षा करना एक ऐसा कार्य है जो उनके धर्म और कर्म दोनों ओर से आवश्यक है या कहें जीव रक्षा करना बिश्नोइयों की मनोवृत्ति है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. सद्गुरु जाम्भोजी ने अपने उन्नतीस नियमों में से एक नियम जीव रक्षा करना बताया है. बिश्नोई समुदाय हमेशा जीवों और पेड़ों की रक्षा के लिये समुद्यत रहता है. हम आपको ऐसी ही शख्सियत से रुबरु करवा रहें है जिनका नाम है मोखराम धारणिया, जिन्होंने बीकानेर जिले में शिकारियों की नाक में दम कर रखा है. हिरणों का शिकार करने जाते शिकारियों को पुलिस-प्रशासन व वन विभाग के कर्मचारियों से ज्यादा खौफ मोखराम बिश्नोई व उनकी टीम का रहता है.

वन्यजीवों के प्रतिपालक अमृतादेवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार से सम्मानित श्री मोखराम  धारणियां


पर्यावरण एवं वन्य जीव प्रेमी, राजस्थानी संस्कृति से लबरेज उच्च विचारों के धनी श्री मोखराम धारणीयां लगभग 20 वर्षों से वन्य-जीवों तथा पेड़ों को बचाने में अनवरत प्रयत्नशील हैं. सांवतसर गांव तहसील श्री डूंगरगढ़ जिला बीकानेर के श्री रामस्वरूप जी धारणियां के यहां मोखराम धारणीयां का जन्म 15 मार्च 1970 को हुआ. वर्तमान में श्री धारणीयां बीकानेर शहर में रहते हैं. आपके दो पुत्र व एक पुत्री है. मोखराम की तरह ही इनकी धर्मपत्नी श्रीमती परमेश्वरी देवी भी दयालु हृदय वाली जीवों पर दया करने वाली महिला है. 

वन्यजीवों के प्रतिपालक अमृतादेवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार से सम्मानित श्री मोखराम  धारणियां


शौर्य-चक्र से सम्मानित निहालचंद धारणियां की शहादत के समय साथ थे मोखराम धारणीयां 

शौर्य-चक्र से सम्मानित निहालचंद धारणियां


मोखराम धारणीयां ने बताया कि वे 3 अक्तूबर 1996 को वन्य-जीवों को बचाने हेतु शहीद हुए शौर्य-चक्र से सम्मानित निहालचंद धारणिया के साथ ही ट्रैक्टर से शिकारियों का पीछा कर रहे थे. तब शिकारियों ने गोलियां चलाई, उसमें बाल-बाल बच गया व उनके परममित्र निहालचन्द शहीद हो गए. उस दिन की घटना ने मोखराम धारणीयां को झकझोर कर रख दिया और उन्होंने प्रण किया कि वन्य-जीवों का शिकार नहीं होने दूंगा. उस दिन की घटना से लेकर आज तक मोखराम ने करीब 3000 से अधिक जीवों के प्राणों की रक्षा की है. आपने पर्यावरण संरक्षण व वन्य-जीवों की रक्षा के लिये सन् 2011 में जीव रक्षा संस्था नामक संगठन की स्थापना की जो बड़ी सिद्दत से वन व वन्यजीवों की रक्षा के लिए बीकानेर जिले में कार्य कर रहा है. संस्था अध्यक्ष श्री मोखराम धारणियां है. बीकानेर जिले में तहसील स्तर पर संगठन की कार्यकारिणी गठित की हुई है. 


मोखराम धारणीयां अखिल भारतीय बिश्नोई जीव रक्षा सभा में भी विभिन्न पदों पर रह चुके हैं.


इससे पहले श्री मोखराम धारणिया अखिल भारतीय बिश्नोई जीव रक्षा सभा से जुड़़े जिसमें पहले संगठन मंत्री और बाद में तहसील अध्यक्ष बीकानेर के रूप में कार्य किया. सन् 2002 में पीपल फॉर एनिमल्स संगठन में बीमार पशुओं की देखरेख हेतु बीकानेर जिला प्रभारी भी नियुक्त किये जा चुके हैं. श्री धारणीयां के कार्यों को देखते हुए राजस्थान सरकार ने इनको 2008 में मानद वन्य-जीव प्रतिपालक जिला बीकानेर नियुक्त किया था.



अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार से सम्मानित है मोखराम धारणीयां



मोखराम धारणीयां तथा उनकी टीम ने बीकानेर शहर/गांवो में वन्य-जीवों की रक्षा के साथ-साथ पौधारोपण भी करते आए है. जिसके लिये इन्हें अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा तथा अन्य संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. श्री मोखराम धारणियां को राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में प्रतिष्ठित पुरस्कार 'अमृता देवी बिश्नोई स्मृति' पुरस्कार से 23 मार्च 2015 को जयपुर में मानवीय मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे सिंधिया द्वारा वन एवं पर्यावरण मंत्री राजस्थान, श्री राजकुमार रणवा की उपस्थिति में वन विभाग के मुख्य कार्यालय 'अरण्य भवन' में सम्मानित किया गया.


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