आइए जानें बिश्नोई रत्न - श्री भागीरथ राय बिश्नोई के बारे में

 

बिश्नोई रत्न - श्री भागीरथ राय बिश्नोई

बिश्नोई रत्न - श्री भागीरथ राय बिश्नोई


श्री भागीरथ राय बिश्नोई का जन्म 07/01/1925 को चक तालिया, बहावलपुर रियासत पाकिस्तान में श्री रामप्रताप बिश्नोई के यहां हुआ। इनके पिता  रामप्रताप बिश्नोई गांव दुतरांवली पंजाब में रहे थे. भागीरथ राय की  शिक्षा अपने मामा की देखरेख में हुई.


श्री बिश्नोई स्टेट हाइस्कुल बहावलपुर से मैट्रीक पास करके डुंगर कौलेज, बीकानेर में प्रवेश लिया. एल-एल बी. की परिक्षा आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से पास की. खेलकुद में भी आपकी रुचि थी, हॉकी से खास लगाव था. इसी कारण आप राजस्थान हॉकी एसोसिएशन के 16-17 वर्षों तक सचिव रहे. आपने अखिल भारतीय हॉकी टीम के साथ, चीफ-डी मिशन बन भाग लिया.


अपनी शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात आप 1948 में बीकानेर रियासत में डिप्टी सुपरिटेण्डेण्ट के पद पर नियुक्त हुए. 1955 में प्रथम पदोन्नती से पुलिस अधिक्षक झालावाड बने. 1971 में श्री बिश्नोई  पुलिस उपमहानिरीक्षक बने.  सन 1971 में ही आप सहायक उपमहानिरीक्षक बने.  आपने पुलिस विभाग का सर्वोच्च पद (पुलिस महानिदेशक, राज.) प्राप्त किया. सन् 1983 में आप पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद से सेवानिवृत्त हुए.


श्री बिश्नोई को सरकार की ओर से उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस मेडल एवं राषट्रपती मेडल से सम्मानित किया गया.


बिश्नोई समाज के लिए श्री भागीरथ राय बिश्नोई का योगदान अविस्मरणीय है.


सेवा की प्रेरणा आपको अपने चाचा स्व. श्री हरीराम बोळा (पूर्व प्रधान, अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा) से तथा अपने ममेरे भाई श्री सहीराम धरणियां (पूर्व प्रधान, अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा) से मिली.  बिश्नोई समाज को बिकानेर व जयपुर की बिश्नोई धर्मशाला श्री भागीरथ राय बिश्नोई की देन है. श्री बिश्नोई से प्रेरित होकर ही सम्पुर्ण बिश्नोई समाज में जागृति उत्पत्न हुई. है यही कारण है कि विगत वर्षो में अनेक गांवों शहरों में मंदीर एवं धर्मशालाएं बनाने का एक अभियान ही चला.


महासभा ने भागीरथ राय को बिश्नोई रत्न से नवाजा.


समाज में अविस्मरणीय योगदान के लिए अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने श्री भागीरथ राय बिश्नोई को बिश्नोई रत्न से सम्मानित किया. 


08/11/1987 को श्री बिश्नोई का निधन हुआ. यह बिश्नोई समाज के लिए अपूर्णिय क्षति थी. आज भागीरथ राय बिश्नोई भले ही हमारे बीच नहीं हैं. पर अपने अविस्मरणीय कार्यों के लिए हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे.



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