प्रेरक कहानी - संगीता बिश्नोई: जिन्दगी की रेस पैरों से नहीं हौसलों से जीती जाती है.

कहानी हौसले से रेस जीतने वाली पेरा एथलेटिक संगीता बिश्नोई की.

संगीता बिश्नोई: जिन्दगी की रेस पैरों से नहीं हौसलों से जीती की जाती है.



हौसले की रेस में ब्लेड रनर संगीता बिश्नोई सबसे आगे


कहते हैं खेल में जीतने के लिए दिमाग के साथ साथ शरीर का स्वस्थ होना उतना ही आवश्यक है जितना वाहन के लिए फ्युल! दौड़ के मैदान में जीतने वाले के पैर कभी खैर नहीं मनाते. पर जब आपको कहें एक पैर से आप दौड़कर दिखाओ तो क्या दौड़ पाओगे! लेकिन हम आपको परिचय करवा रहें एक ऐसी धावक का जो हौसले की रेस में सदा विजयी हुई है. उसका नाम संगीता बिश्नोई हैं.


 मूलत: बुद्धनगर, जोधपुर की रहने वाली है संगीता बिश्नोई. एक हादसे ने संगीता को भले ही दिव्यांग बना दिया, लेकिन उसने अपने हौसले की उड़ान से जीवन की हर चुनौती स्वीकार करते हुए खेलकूद के क्षेत्र में सफलता का परचम लहराया. 


संगीता के पिता रामसुख विश्नोई ने बताया कि जब वह सात वर्ष की थी. तब वर्ष 1996 में मामा के विवाह समारोह के दौरान 1100 केवी की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने के कारण उसने दांया हाथ और पैर गंवा दिया. 


जब स्कूल में बच्चों को दौड़ते हुए देखती तो संगीता बालमन भी दौड़ने को मचलता था. दौड़ने की ललक ने उसके मन को आत्मविश्वास से भर दिया. फिर क्या! नियति के अभिशाप को कमजोरी के बजाय ताकत बनाते हुए संगीता नए संकल्प, लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने लगी.


महज 10 वर्ष की उम्र में संगीता मिनी पैरा ओलम्पिक गेम्स, इंग्लैण्ड में जीता स्वर्ण पदक.

पुर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ पेरा एथलिट संगीता बिश्नोई


वर्ष 2003-04 आयोजित मिनी पैरा ओलम्पिक गेम्स, इंग्लैण्ड में संगीता बिश्नोई ने स्वर्ण पदक जीता. इतना ही नहीं संगीता  ऑल राउण्ड प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुनी गई. मिनी पैरा ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने पर तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने संगीता के जज्बे को सलाम किया और सम्मानित किया.

राज्य सरकार ने विशेष योग्यजनों के कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2014 में संगीता बिश्नोई को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया. 


अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में संगीता ने अनेक पदक जीते.


वर्ष 2010 में अंतर्राष्ट्रीय मिनी पैरा औलम्पिक, लंदन में क्रिकेट बॉल थ्रो प्रतियोगिता में संगीता ने स्वर्ण पदक हासिल किया. वर्ष 2012 में हाजीपुर, बिहार में आयोजित चौथी भारतीय सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता. जयपुर में सातवीं राज्य स्तरीय पैरा एथलीट प्रतियोगिता में 100 व 200 मीटर दौड़ और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक और रैली में कांस्य मैडल जीता था.


 इतना ही नहीं वर्ष 2017 में उदयपुर में हुई आठवीं राज्य स्तरीय पैरा एथलीट प्रतियोगिता में संगीता बिश्नोई ने तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए. संगीता 100 मीटर और 400 मीटर दौड़ व डिस्कस थ्रो में पहले स्थान पर रही. हरियाणा के पंचकुला में आयोजित अठारहवीं राष्ट्रीय पैरा एथलीट चैम्पियनशीप में 100 और 200 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त कर रजत पदक जीता. 


संगीता ने वर्ष 2017 में जयपुर साइक्लिंग कम्युनिटी की ओर से आयोजित प्रथम साइक्लोथॉन (50किमी) में और रोटरी क्लब ऑफ जोधपुर संस्कार की ओर से आयोजित द्वितीय साइक्लोथॉन (22 किमी) में भी भाग लिया है. 

28 वर्षीय संगीता कलावर्ग में स्नातेकोत्तर है. खेल के साथ पढ़ाई में रूचि होने के कारण संगीता शिक्षा के क्षेत्र आगे बढ़ना चाहती हैं.



महासभा ने किया सम्मानित


संगीता बिश्नोई को उनके प्रेरणादायी प्रयास व खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अखिल भारतीय महासभा ने प्रसस्ति पत्र, स्मृति चिह्न व शॉल उठाकर सम्मानित किया. 


 संगीता बिश्नोई की यह कहानी हमें जिन्दगी में सकारात्मकता से सबकुछ अर्जित करने की प्रेरणा देती है. 


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