संघर्ष और संस्कारों की नज़ीर बना मारवाड़ का बेटा इंजीनियर मांगीलाल बिश्नोई



संघर्ष और संस्कारों की नज़ीर बना मारवाड़ का बेटा इंजीनियर मांगीलाल बिश्नोई

संघर्ष और संस्कारों की नज़ीर बना मारवाड़ का बेटा इंजीनियर मांगीलाल बिश्नोई


मारवाड़ के बेटे मांगीलाल बिश्नोई ने मुश्किल हालातों में संघर्ष कर आईआईटी में प्रवेश लिया और अब है विदेशी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर. लेकिन कहते है संस्कार युक्त शिक्षा हमेशा अच्छाईयों की मिशाल बनती है. जिसका उदाहरण भी आईआईटी पास आउट इंजीनियर मांगीलाल बिश्नोई ने पेश किया है. जोधपुर जिले के एकलखोरी निवासी मोहनराम सारण के सुपुत्र मांगीलाल बिश्नोई ने देश के सबसे बड़े इंस्टीट्यूट आईआईटी रुड़की से बीटेक की डिग्री पूर्ण की हैं. जहां उन्हें बेंगलोर में स्थित विदेशी प्राइवेट कम्पनी सिस्को ने सालाना के 37 लाख पैकेज पर नौकरी प्रदान की हैं.


पहली तनख्वाह गौ सेवा के लिए की दान इंजीनियर मांगीलाल बिश्नोई ने


आईआईटी पास आउट होने के बाद इतने बड़े पैकेज के साथ प्रथम नियुक्ति मिलते ही मांगीलाल बिश्नोई ने अपने जीवन की पहले महिने की तनख्वाह को हिरण रक्षार्थ शहीद शैतानसिंह गौशाला भोजासर में गौ माताओं की सेवा के लिए दी. एकलखोरी के भामाशाह इंजीनियर मांगीलाल बिश्नोई के पिता मोहनराम सारण द्वारा शिरण रक्षार्थ शहीद शैतानसिंह गौशाला भोजासर में गोदान के लिए 31 क्विंटल बाजरी खुद के परिवहन खर्चे से दान की. इससे पहले भी 90 हजार रुपए का दाळा, कोरमा व खळ दान की. साथ ही विश्व स्तरीय गो चिकित्सालय नागौर में 20 क्विंटल गेहूँ, भेजे और एक लाख का चारा भेजने की घोषणा की।. इंजिनियर मांगीलाल बिश्नोई एकलखोरी का कहना है कि हम देश में रहते वहां गाय को माता का दर्जा दिया गया है. इसलिए गोवंश की सेवा से बढ़कर पुण्य का कोई कार्य नहीं हो सकता है.


संघर्ष से हासिल किया मुकाम


मांगीलाल बिश्नोई के जीवन में इतना बड़े सफल मुकाम के पीछे संघर्षपूर्ण कहानी है. मांगीलाल ने माध्यमिक तक की शिक्षा ओसियां तहसील में प्राप्त की और आगे की शिक्षा जोधपुर में रहकर ग्रहण की. इंजिनियर बनने के सपने को हकीकत में बदलने के लिए शिक्षा नगरी कोटा चले गए. जहां उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी की. मांगीलाल बताते है कि इस दौरान उनके जीवन में बहुत कठिनाइयां आई. आर्थिक स्थिती बहुत खराब थी लेकिन परिवार ने पुरा सहयोग व साथ दिया. जिसके बदोलत आज वो अपने सपने को हकीकत में बदल सके. 


जताया आभार


हिरण रक्षार्थ शहीद शैतान सिंह गोशाला भोजासर के संरक्षक संत बलदेवानंद शास्त्री व अध्यक्ष पूर्व सरपंच कैप्टन धोंकलरीम विश्नोई व सरपंच पूनमचंद विनोई, एसकेडीजीएमएस अध्यक्ष दिनेश सजनाणी, ठेकेदार भैरारामण कैलनसर, राजेश सारण भोजासर, मैमराज जाणी हरलावा ने मारवाड़ के इस बैटे की पहल की सराहना करते हुए आभार जताया. 

उन्होंने बताया कि इंजीनियर मांगीलाल के उत्कृष्ट कार्य जो युवाओं के लिए प्रेरणादायक है.   इंजीनियर के द्वारा गौशाला पुण्य में अपनी प्रथम सैलरी देकर पर्मार्थ का कार्य किया है. वो युवा व समाज के लिए प्रेरणादायक है. शिक्षा के साथ संस्कार का जीवन में होना कितना आवश्यक है यह मांगीलाल ने अपने कार्यों से हमें बताया है.



आज जीवन में जो भी मुकाम हासिल किया है उसका श्रैय मेरे परिवार को जाता है. जिन्होंने मुझे साथ दिया, हिम्मत दी और मेरे सपने को हकीकत में बदलने में पूरा सहयोग दिया. श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की कृपा हमेशा रही इस वजह से आज मेरे पास जो कुछ भी है वो समाज के लिए है, समाज के लोगों के लिए है. 

मांगीलाल बिश्नोई, साफ्टवेयर इंजीनियर


न्युज साभार: दैनिक नवज्योती, आऊ

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