अनोखा अनाथालय - प्रकृति प्रेमी बेटी कर रही है अनाथ हिरणों की सेवा

 अनोखा अनाथालय - प्रकृति प्रेमी बेटी पूजा बिश्नोई कर रही है अनाथ हिरणों की सेवा 

अनोखा अनाथालय - प्रकृति प्रेमी बेटी कर रही है अनाथ हिरणों की सेवा


अक्सर कहते हैं संस्कार और संस्कृति बच्चों बालमन पर गहरा असर छोड़ती है. तरुण अवस्था में आते-आते ये मनोवृति बन जाती है. संस्कार व संस्कृति के बैजोड़ समिश्रण से निर्मित मनोवृत्ति से लबरेज मनुष्य महान बन जाता है. यह कहानी है ऐसे ही महान व्यक्तित्व की धनी बेटी पूजा बिश्नोई की. 

हिरण का उपचार करते डॉ मनोज गोदारा सहयोग में पूजा बिश्नोई


पूजा का जन्म नागौर जिले के श्रीबालाजी ग्राम के रामरत्न बिश्नोई के यहां हुआ. रामरत्न बिश्नोई स्वयं वाणिज्य विषय स्नातकोत्तर होने के साथ अच्छे साहित्यकार है. वो बिश्नोई संदेश पत्रिका के माध्यम से समाज में अलख जागाने का काम कर रहे हैं साथ ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सिद्दत से लगे हुए. संस्कार व बिश्नोई संस्कृति (जीव दया पालणी, रूंख लीलो नी घावे) का प्रभाव पूजा के व्यक्तित्व से स्पष्ट झलकता है. यही कारण है कि पूजा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी "ज्यादा पढ़ाई वाले बच्चे घर , परिवार या आसपास होने वाली परिस्थितियों पर ध्यान नहीं देते हैं" की उक्ती को गलत साबित कर रही है. पूजा कोरोना काल की विपरीत परिस्थितयों में भी घर पर रहकर मुक वन्य जीवों की रक्षा ही नहीं कर रही हैं बल्कि उनका पालन - पोषण भी बखूबी बच्चों या मेहमानों की तरह कर रही हैं. पूजा  एम ए तक शिक्षित है तथा हाल ही में उसने एसोसिएट प्रोफेसर राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट परीक्षा) भी पास कर ली है. पूजा ने बताया कि उन्होंनें 15 अगस्त 2019 को क्षेत्र में अनाथ के रुप में घर पर एक हिरण शावक मादा का लालन-पालन शुरु किया था. उसका नाम "सोना" रखा. उसके बाद 7 अक्टूबर 2019 को एक दूसरा अनाथ मूक जीव नर शावक घर में आया  जिसका नाम "सोनू" रखा. इन दोनों की चहल पहल से हमारा आंगन हर वक्त उमंग भरा रहता है. रात दिन चंचलता चपलता से हम सबको परेशान करते रहते हैं. हम सबको ये दोनों बहुत प्यार लुटाते हैं. हम भी इनसे बहुत स्नेह करते हैं. पलंग पर साथ में सोते हैं. हमारे साथ दौड़ते व उछल कूद कर खेलते हैं. साथ में और एक ही थाली भोजन भी करते हैं. सब्जी ,रोटी , चना ,भुजिया , बादाम की कतली , नमकीन , मूंगफली का गोटा , सभी प्रकार के फल सलाद , बड़ी,पापड़ , मोठ , हरी सब्जियां , खेजड़ी की पनड़ी , बेर,पाला , अनाज आदि बड़े चाव से खाते हैं.  सर्दी में कपड़ा ओढ़कर बैठते हैं. हमेशा साफ सुथरे पलंग पर , बेडसीट लगे बिस्तर पर ही बैठते हैं. शंका व लघुशंका के लिए बाहर जाते हैं. एकदम साफ सुथरे रहते हैं. शैशव अवस्था में हर दो घंटों बाद गर्म दूध पिलाना पड़ता था. अब सब कुछ खाने , पानी पीने लगे हैं. वन्यजीवों की सेवा व स्नेह प्यार अद्भुत है. ईश्वरीय रचना हर किसी का मन मोहने वाली है.

पूजा बिश्नोई हिरणों को दाना खिलाती हुई


    

 इसी तरह 3  मार्च  2020 "विश्व वन्यजीव दिवस " के दिन  इनके घर एक अनाथ वन्यजीव नन्हा मेहमान और आया. जिसकी मां हिरणी की मौत होने से शावक को नरेश गिला , जेपी गिला , सुनील पंवार, रामनिवास पंवार निवासी अलाय लेकर आये. उनको यह गांव थलाजूं की सीमा में मिला था जो शिकारी कुत्तों के चंगुल से बचाकर लाया गया. बेटी पूजा पहले से ही दो अनाथ सोना व सोनू का लालन पालन कर रही थीं. अब इनकी संख्या तीन हो गई. विख्यात मोटिवेशनल वक्ता व पूजा के भाई लक्ष्मण बिश्नोई "लक्ष्य" ने बताया कि गत 15 अगस्त को ग्राम श्री बालाजी के पूर्व सरपंच श्याम सुंदर साद के खेत में उसके सामने ही शिकारी कुत्तों ने एक प्रसूता हिरणी को मार डाला था तब अनाथ शावक सोना को घर लाकर पूजा को सौंपी थी.  इस तरह एक एक करके अनाथ शावक घर आते गए जिनका घर में देखभाल पालन - पोषण होता रहा. जो धीरे धीरे आंकड़ा अब छ: तक पहुंच गया है. पूजा के शयन-कक्ष में सब शावक सोते हैं. उनको दूध पिलाना , पानी पिलाना , खाद्य सामग्री देना , सुबह शाम बाहर घुमाना , साफ सफाई करना , गोद में खिलाना , लाड-प्यार करना , पौधे लगाना , उनमें पानी सींचना , घर के काम करने के साथ साथ पढाई करना. ये सब गौरवपूर्ण कार्य है. ऐसी प्रकृति प्रेमी समर्पित भाव वाली बेटी पूजा को हृदय की अतल गहराईयों से आशीर्वाद , स्नेह. वन्य जीव विशेषज्ञ एवं पद्मश्री से सम्मानित हिम्मताराम भांभू  का कहना हैं कि 

मूक वन्यजीव हिरणों के अनाथ शावकों का लालन-पालन मानव शिशुओं या नए मेहमानों की तरह आवभगत कर अपना मुक वन्य जीवों से अपनापन दिखा रही हैं. वास्तव में अगर इस तरह आमजन मुक जीवों से प्रेम करने लगे तो दुर्लभ मुक वन्य जीव जो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है को बचाया जा सकता है.


पूजा ने मनाया हिरणी सोना का जन्म दिन

पूजा ने मनाया हिरणी सोना का जन्म दिन


श्रीबालाजी गांव के सरपंच सुखदेव स्वामी ने बताया कि पूजा का जीव प्रेम अदभुत हैं. उन्होनें समय पूर्व फोन कर घर बुलाया की घर पर हिरणी का जन्म दिवस है , आप मुख्य अतिथि हो. ये सुनकर आश्चर्य हुआ कि लोग अपने बच्चों के जन्म दिवस भी भूल जाते है , पर इस बच्ची ने बुलाया है जाऊंगा. कार्यक्रम में  बच्चों के जन्मदिवस की तरह ही में तरह ही मेरे आतिथ्य में केक काटी गई , पर्यावरण प्रेमी जयकिशन धारणियां सथेरण ने गुब्बारे फोड़े. जंभेश्वर मंदिर सेवा समिति श्रीबालाजी के कोषाध्यक्ष वेद प्रकाश धारणियां ने सोना शावक को गोदी में उठा कर आशीर्वाद दिया. समिति के महामंत्री ठेकेदार पूनमचन्द बिश्नोई ने सोना को नमकीन खिला कर आशीर्वाद दिया. माहेश्वरी सत्यनारायण भट्टड़ ने सोना को हरा चारा खिलाकर हेपी बर्थडे टू यू बोला. नरपत चौधरी ने सोना को चना और बादाम खिला कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी. श्री जंभेश्वर पर्यावरण एवं जीवरक्षा प्रदेश संस्था राजस्थान के अध्यक्ष रामरत्न बिश्नोई ने वन्य जीव सुरक्षा और मूक प्राणियों की सेवा का संकल्प सभी को दिलाया और सोना का लालन-पालन करने वाली बेटी पूजा बिश्नोई की सेवा से प्रेरणा लेकर जीव दया के कार्य करते रहने की अपील की. इस तरह एक मुक वन्य जीव हिरण मादा सोना का जन्म दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया जिसमें उपस्थित सभी सदस्यों ने आश्चर्यचकित प्रफुल्ल मन से भोले व सुंदर मूक प्राणी को आशीर्वाद दिया और वन्यजीवों की सेवा करने का संकल्प लिया.


 चूंकि स्वस्थ हुए मुक वन्य जीवों के अपने कुनबे में स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ा जाना , प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो सके , स्वतंत्र कुलाचे भर सके जरूरी हैं इस सोच कर पूजा ने  यह आयोजन रखा गया. सोना की बर्थडे पार्टी में वन्यजीव प्रेमी बस्तीराम सीगड़, प्रवीण,अनिता ,संगीता ,पूजा की मां पूनमदेवी गिला, रचना धारणिया सहित सभी ने संगीत की मधुर धुन पर नृत्य कर उमंग के साथ उत्सव मनाया और सोना को बहुत सारा प्यार लुटाते हुए आशीर्वाद दिया.  ज्ञातव्य है कि सोना के दो माह बाद डूंगररामजी सुथार के खेत से एक अनाथ शावक मादा हिरण सोनू उर्फ छोटू लाया गया था जिसका पालन पोषण भी पूजा कर रही है वह भी समारोह में उपस्थित रहा उसकी चंचलता भी सबको अचंभित करती रही.


लॉकडाउन में वन्य जीवों की देखभाल के साथ  गमले, परिंडे व खेळी बनाई.

लॉकडाउन में वन्य जीवों की देखभाल के साथ  गमले, परिंडे व खेळी बनाई.


पूजा ने अपने भाई लक्ष्मण बिश्नोई 'लक्ष्य' के साथ मिलकर  लॉकडाउन में स्वयं गमले बनाएं वो एक दो नहीं इक्कीस जिन पर कारीगरी- कलाकारी अति सुंदर बनाई गई. उन्होंने पौधे लगाने के लिए 21 गमले ,  चिड़िया - कबूतरों के पानी पीने के लिए कुछ परिंडे और हिरणों के पानी पीने के लिए एक खेळी बनाई है. सजावटी मिनिएचर झोंपड़ी और कुआं भी बनाए हैं. कच्चा माल सीमेंट बजरी लगा है. खाली समय का अच्छा उपयोग हुआ है. इनके साथ साथ गार्डन का एक कोना खेजड़ली के 363 शहीदों को समर्पित कर एक स्मारक चिह्न निर्मित किया है. जिनका नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने निरीक्षण कर पूजा एक्सीलेंट बोल कर आशीर्वाद दिया.


इस प्रेरक कहानी को हमसे साझा किया है: श्री अनिल बिश्नोई , लखासर ने.






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