Sant Jambhoji History : संत जाम्भोजी का इतिहास

  

राजस्थान के लोक संत : गुरु जाम्भोजी जीवन शिक्षा और बिश्नोई समाज

गुरु जाम्भोजी का इतिहास | Guru Jambhoji ki History


नमस्कार साथियों यह, ब्लॉग पोस्ट उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए। राजस्थान की कला संस्कृति को राज्य की हर भर्ती परीक्षा के सेलेब्स में सम्मिलित किया गया है। विभिन्न परीक्षाओं में गुरु जाम्भोजी, बिश्नोई और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते रहे हैं। इस पोस्ट में आप राजस्थान के लोक संत गुरु जाम्भोजी और बिश्नोई समाज के बारें सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। साथ ही विभिन्न परिक्षाओं में आए गुरु जम्भेश्वर, बिश्नोई समाज और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रश्नों को सम्मिलित किए गए है।

गुरु जाम्भोजी और पर्यावरण संरक्षण

Sant Jambhoji History : संत जाम्भोजी का इतिहास

  • जांभोजी का मूल नाम धनराज था।
नोट: मूल नाम के संदर्भ में कोई ऑथेंटिक स्योर्स उपलब्ध नहीं है। यह प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उपयोगी पुस्तकों में प्रकाशित होने के कारण लिखा हुआ है।

  • गुरु जंभेश्वर जी का जन्म 1451 ईस्वी (विक्रम संवत 1508) में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन नागौर जिले के पीपासर ग्राम में हुआ।
  • जांभोजी के पिता का नाम श्री लोहट जी पंवार व माता का नाम हंसादेवी था। इनके पिता पंवार गोत्रिय राजपूत थे। 
  •  इनके गुरु का नाम गोरखनाथ था।
  • इनकी माता हंसादेवी ने उन्हें श्रीकृष्ण का अवतार माना। 
  • 34 वर्ष की उम्र में सम्पत्ति अकाल ग्रसित लोगों की सहायता में लगे।
  • गुरु जांभोजी का मूल उपदेश स्थल समराथल है।
  • जांभोजी ने बिश्नोई समाज के लोगों के लिए 29 नियम की आचार संहिता बनाई। इसी आधार पर कई इतिहासकारों ने बीस और नों नियमों को मानने वाले को बिश्नोई कहा है। 
  •  गुरु जांभोजी को पर्यावरण वैज्ञानिक भी कहा जाता है।
  • शब्दवाणी/जम्भवाणी का मुख्य ध्येय  'जीया ने जुगती मुवा ने मुक्ति' है।

बिश्नोई समाज की स्थापना : Sant Jambhoji

  • जाम्भोजी ने 1485 में समराथल (बीकानेर) में बिश्नोई सम्प्रदाय का प्रवर्तन किया।
  • गुरु महाराज ने  पुल्होजी पंवार को दीक्षित कर सर्वप्रथम बिश्नोई बनाया।
  • गुरु जम्भेश्वर की वाणी के लिखित ग्रन्थ 'जम्भसंहिता', 'जम्भसागर शब्दवाणी' और 'विश्नोई धर्म प्रकाश' आदि है।
  • गुरु जम्भेश्वर जी ने अपने जीवन काल में अनेक शब्द कहे किंतु वर्तमान में 120 शब्द ही उपलब्ध है जिन्हें जंभ वाणी या शब्दवाणी के नाम से जाना जाता है।
  • संत जाम्भोजी ने हिन्दू तथा मुस्लिम धर्मों में व्याप्त आडम्बरों का विरोध किया।

  • कहा जाता है कि दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी ने गुरु जांभोजी से प्रभावित होकर गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था।
गुरु जांभोजी, बिश्नोई और गौ रक्षा

  • गुरु जाम्भोजी ने कार्तिक बदी अष्टमी को समराथल धोरे पर बिश्नोई समाज/संप्रदाय की स्थापना की। समराथल धाम बिश्नोईयों का आद्य स्थल है समराथल को धोक धोरे के नाम से भी जाना जाता है।
  • गुरु महाराज के श्री मुख से उच्चरित वाणी को शब्दवाणी कहते हैं। बिश्नोई लोग अमावस्या को व नित्य‌ प्रति हवन में शब्दवाणी का सस्वर पाठ करते हैं।
  • इनके के अनुयायी 151 शब्दों का संकलन जम्भवाणी को 'पांचवां वेद' मानते हैं। यह राजस्थानी भाषा का उत्कृष्ट ग्रंथ है।
  • बीकानेर के झण्डे में खेजड़े का वृक्ष को राजा ने संत जाम्भोजी के सम्मान में जगह दी।
  •  राव दूदा जम्भेश्वर के समकालीन थे। 
  • जाम्भोजी को गुंगा/ गेहला उपनाम से भी जाना जाता है। 
  • बिश्नोई नीले रंग के वस्त्र नहीं पहनते हैं।
  • जाम्भोजी के उपदेश स्थल साथरी कहलाते है।
  • इन साथरियों पर नित्यप्रति हवन किया जाता है व पक्षियों को चुग्गा डाला जाता है।


 बिश्नोई सम्प्रदाय/समाज के लोग गुरु जाम्भोजी को विष्णु का अवतार मानते हैं।


  • गुरु जाम्भोजी का मूलमंत्र था- हृदय से विष्णु का नाम जपो और हाथ से कार्य करो।' 
विष्णु विष्णु भज मनवा, विष्णु जग आधार।
विष्णु फळ अनंत रसीलो, ध्याता उतरे पार।।

  • गुरु जाम्भोजी ने संसार को नाशवान और मिथ्या बताया। इन्होंने इसे 'गोवलवास' (अस्थाई निवास) कहा।
  •  पाहल – गुरु जाम्भोजी द्वारा तैयार 'अभिमंत्रित जल' जिसे पिलाकर इन्होंने आज्ञानुवर्ती समुदाय को बिश्नोई पंथ में दीक्षित किया था।
  • राज्य के 23 वन्यजीव संरक्षण/कंजर्वेशन क्षेत्र में से 7 बिश्नोई बाहुल ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌क्षेत्र में स्थित है। 
  • वन वन्य जीवों को बचाने के लिए ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌बिश्नोई समाज के लोग अपनी जान तक देने में पीछे नहीं हटते हैं।
  • गुरु जम्भेश्वर महाराज के 'जीव दया पालणी रूंख लीलो नी घावे' उक्ति को चरितार्थ करते हुए अनेक बिश्नोईयों ने प्राणोत्सर्ग किया है।

गुरु जाम्भोजी से प्रभावित होकर शरण में आए राजा

कथा जैसलमेर की: संत कवि वील्होजी (सन् 1532 - 1616) द्वारा लिखित प्रसिद्ध कविता, जिसमें ऐसे छः राजाओं के नामों का पता चलता है, जो गुरु जाम्भोजी के समकालीन थे और उनकी शरण में आये थे। ये छः राजा निम्नलिखित थे।

  1.  सिकन्दर लोदी, दिल्ली का बादशाह 
  2. नवाब मुहम्मद खाँ नागौरी, नागौर
  3.  राव दूदा, मेड़ता
  4. राव जैतसी, जैसमलेर
  5. राव सातल देव, जोधपुर  
  6. महाराणा सांगा, मेवाड़


गुरु जांभोजी से संबंधित स्थल | Guru Jambheshwar Sathri


पीपासर :  नागौर जिले में स्थित पीपासर गुरू जम्भेश्वर जी की जन्म स्थली है। यहाँ उनका मंदिर है तथा उनका प्राचीन घर और उनकी खड़ाऊ यहीं पर है।

 

समराथल: यहां पर गुरु जाम्भोजी ने बिश्नोई समाज की स्थापना की थी। समराथल धोरे से ही गुरु जाम्भोजी ने लोगों को जागृत किया था ।


मुक्तिधाम मुकाम : यहाँ गुरू जम्भेश्वर जी की समाधि स्थित है। बीकानेर जिले की नोखा तहसील में स्थित मुकाम में सफेद संगमरमर से बना दुधिया रंग में रंगा स्थापत्यकला की दृष्टि से अनुपम मंदिर भी बना हुआ है। जहाँ प्रतिवर्ष फाल्गुन व आश्विन की अमावस्या को मेला लगता है।


 लालसर :  जम्भेश्वर जी ने यहाँ निर्वाण प्राप्त किया था। 

गुरु जम्भेश्वर निर्वाण स्थल : लालासर साथरी धाम


 जाम्बा/जाम्भोलाव : जाम्बा गांव जोधपुर जिले के फलौदी तहसील में स्थित है। गुरु जम्भेश्वर जी के कहने पर जैसलमेर के राजा जैतसिंह ने यहाँ एक तालाब बनवाया था। बिश्नोई समाज के लिए यह पुष्कर के समान पावन तीर्थ है। यहाँ प्रत्येक वर्ष चैत्र अमावस्या व भाद्र पूर्णिमा को मेला लगता है।

गंगा सो तीर्थ मुकुट मणि धाम।

जो जन न्हावे उतरे पाप नाम ।।


जांगलू: यह बीकानेर की नोखा तहसील में स्थित है। जम्भेश्वर जी का यहाँ पर सुन्दर मंदिर है।  यह भसेवडा के नाम सेे जाना जाता है।

गुरु जंभेश्वर मंदिर जांगलू के बारे में विस्तृत जानकारी

रामड़ावास: यह जोधपुर जिले में पीपल के पास स्थित है। यहाँ जम्भेश्वर जी ने उपदेश दिये थे।


लोदीपुर: उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित है। अपने भ्रमण के दौरान जम्भेश्वर जी यहाँ आये थे। उन्होंने यहां खेजड़ी का वृक्ष लगाया था। 

लोदीपुर धाम के बारे में विस्तृत लेख पढ़ें


रोटू: रोटू नागौर जिले में स्थित है। यहां गुरु जांभोजी ने अपने शिष्या नवरंगी/नोरंगी बाई को भात भरा था। उस वक्त रोटू गांव की सीमा में गुरु जाम्भोजी द्वारा 3700 खेजड़ी के वृक्ष लगाए गए थे। यह गुरु जांभोजी की पर्यावरणीय शिक्षाओं का नायाब स्थल है।


खेजड़ली धाम : यहां सन् 1730 में बिश्नोई समाज के लोगों ने गुरु जाम्भोजी के संदेश 'रूंख लीलो नी घावे' का अनुसरण करते हुए वृक्षों को बचाने के लिए आत्म बलिदान दिया। यहां 363 बिश्नोई स्त्री और पुरुषों ने जोधपुर के दीवान गिरधर भंडारी के खेजड़ी के वृक्ष को काटने के आदेश के विरुद्ध वृक्षों से लिपट कर अपनी देह अर्पित कर वृक्षों को बचाया। खेजड़ली में शहीद हुए लोगों की याद में विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला खेजड़ली में आयोजित किया जाता है।

इनके अलावा भी गुरु जम्भेश्वर भगवान के मंदिर/साथरी गांव-गांव बने हुए हैं। 


बिश्नोई समाज के लोग भेड़-बकरी का पालन नहीं करते। गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा प्रतिपादित बिश्नोई संप्रदाय के 29 नियम में एक नियम 'अमर रखावे थाट' भी है। रोटु ग्राम में आज भी अमर थाट रखते हैं। बिश्नोई विचारधारा का अनुसरण करने वाले लोग अहिंसा वादी है। ऐसा कोई भी कार्य नहीं करते जिससे हिंसा को बढ़ावा मिले। गुरु जम्भेश्वर भगवान ने बिश्नोईयों को गोपालन का संदेश दिया। धीरे-धीरे सत्य ही बिश्नोई ने भेड़ बकरी पालन को छोड़ दिया।

1536 ई. (वि. सं. 1593) में नवमी के दिन हरि कंकड़ी के नीचे लालासर साथरी में अपनी देह त्यागी। मुक्ति धाम मुकाम में समाधि दी गई। बिश्नोई लोग इस दिन को 'चिलत नवमी' भी कहते हैं। गुरु महाराज की समाधि पर संगमरमर से सफेद दुधिया रंग का भव्य मंदिर का निर्माण किया गया बिश्नोईयों के मुख्य अष्ट धामों में से एक है।




FAQ: विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में पूछे गए बिश्नोई समाज व जांभोजी से संबंधित प्रश्न।


Q. लोक संत जाम्भोजी / गुरु जंभेश्वर के अनुयायी कहलाते है। (टेक्स एमि-2015)

बिश्नोई


Q. विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक जाम्भोजी को किसका अवतार माना जाता है? (ग्रेड तृतीय-2013)

 विष्णु

Q. विश्नोई समुदाय के गुरू माने जाते हैं?(वनरक्षक-2013)

 गुरु जम्भेश्वर


Q. राजस्थान के किस भाग में विश्नोई समुदाय बहुतायत रूप से निवास करते हैं?(आरएसआरटीसी एलटीई 2013)

  उत्तर-पश्चिमी भाग


Q. दिव्य पर्यावरण चेतना, जैसी आधुनिक शब्दावली का महत्व पहले से ही किस संत ने जान लिया था? (ग्राम सेवक 2008, कृषि पर्यवेक्षक- 2012 )

गुरु जाम्भोजी


Q. विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भेश्वर से संबंधित कौनसा मुख्य स्थान है?(आरपीएससी 2004)

 मुक्तिधाम मुकाम


Q. मुकाम नोखा, राजस्थान का ग्रामीण विश्नोई संप्रदाय किस लोक संत के अनुयायी है? (आरएएस प्री-1998, 2003)

 गुरू जम्भेश्वर जी

Q. जांभोजी ने 1485 में समराथल (बीकानेर) में विश्नोई का प्रवर्तन किया। इस संप्रदाय के अनुयायी कितने नियमें की अनुपालना करते हैं ?

29


Q. विश्व का एक मात्र समुदाय जो वन्य जीवों की रक्षा और संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है?

 बिश्नोई समुदाय


Q. विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला कहां आयोजित होता है?

खेजड़ली


Q. राजस्थान का कौनसा समुदाय वन्यजीव संरक्षण व सुरक्षा के लिए प्रसिद्ध है? (ACF - 2021)

बिश्नोई


Q. खेजड़ली गांव जो खेजड़ी के वृक्षों के संरक्षण हेतु बलिदान देने के लिए प्रसिद्ध है राजस्थान के कौन से जिले से संबंधित है? (ACF-2021)

जोधपुर 


साथियों हमने आपसे इस ब्लॉग पोस्ट में बिश्नोई समाज के संस्थापक गुरु जंभेश्वर महाराज के बारे में प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण जानकारी विस्तृत रूप से साझा की है। आशा है यह आपके लिए रुचिकर और उपयोगी सिद्ध होगी।  अगर आपके पास  Guru Jambhoji से संबंधित कोई प्रश्न, सुझाव या शिकायत है तो टिप्पणी में अवश्य लिखें।


आपसे निवेदन है इस पोस्ट को अपने उन दोस्तों के साथ साझा कीजिए जो किसी ना किसी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हैं।

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Highlights:

  • राजस्थान के लोक संत गुरु जाम्भोजी 
  • Sant Jambhoji History
  • गुरु जाम्भोजी, बिश्नोई समाज और पर्यावरण संरक्षण
  • बिश्नोई समाज की स्थापना : Sant Jambhoji
  • गुरु जंभेश्वर जी का जन्म
  • गुरु जांभोजी द्वारा प्रतिपादित बिश्नोई संप्रदाय के 29 नियम

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