अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक मेहराणा धोरा‌ : पंजाब की ऐतिहासिक धरोहर

   अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक मेहराणा धोरा‌ : पंजाब की ऐतिहासिक धरोहर

अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक मेहराणा धोरा‌ : पंजाब की ऐतिहासिक धरोहर


पंजाब सस्कार ने 15 अगस्त के ऐतिहासिक पर्व पर सदियों तक नहीं भूलने वाली सौगात से समाज की झोली भरी। मेहराणा धोरा पर खेजड़ली शहीदों की स्मृति मे स्मारक बनाया गया है।

उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के प्रस्ताव पर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल ने मेहराणा धोरा पर 10 करोड़ की लागत से 363 खेजड़ली शहीदों की स्मृति में माता अमृता देवी बिश्नोई स्मारक एवं वन जागरुकता पार्क स्वीकृत किया था।

शहीद माता अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक मेहराणा धोरा‌


अब इसका उद्धाटन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऑनलाइन करके आमजन के लिए खोल दिया है। अमृता देवी बिश्नोई नेचुरल पार्क को इबादत 2016 में अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई महासभा के एक शिष्ट मंडल एवं पंजाब सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल ने लिखी थी।

वर्ष 2015 में अभा जीव रक्षा बिश्नोई सभा के शिष्ट मंडल एवं मुख्यमंत्री बादल की पहली मिटिंग में ही इस प्रस्ताव को न केवल हरी झंडो मिली बल्कि वन विभाग से लेकर वित्त विभाग के अधिकारियों की मीटिंग में बुलाकर‌ निर्देश दिए कि राजस्थान के जोधपुर जिले के‌ खेजड़ली गांव में पर्यावरण संरक्षण के लिए शहीद हुए 363 अमर शहीदों की स्मृति में जलियांवाला बाग की तर्ज पर महाराजपुर घोरा पर स्मास्क बनवाया जाए।

बिश्नोई समाज  के‌ शिष्ट मंडल की मांग व पंजाब का गौरव बढ़ाने वाली मांग पर मुख्यमंत्री‌ बादल ने 3 घंटे में ही अधिकारियों की मीटिंग बुलाकर जमीन एक्वायर‌ करा निर्माण के आदेश तक दे दिए। तब से चल रहे निमार्ण कार्य के 4 साल बाद यह पार्क बन कर तैयार हो गया।


अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक मेहराणा धोरा‌ का ऑनलाइन लोकार्पण पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया

15 अगस्त 2020 को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसका ऑनलाइन लोकार्पण कर‌ समाज का गौरव बढ़ाया। अब नेचुरल पार्क को आमजन के लिए खोल दिया है। समाज के ऐतिहासिक गौरवशाली पल पर अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई महासभा की तरफ से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह एवं पूर्व मुख्यमंत्री बादल का आभार व्यक्त किया गया है।

 मेहराना धोरा मंदिर के सामने पर्यावरण रक्षार्थ 363 शहीदों की यादगार में बने भव्य स्मारक समाज में एक आदर्श प्रस्तुत करने वाला है। इसी तर्ज पर हर राज्य मे ऐसे स्मारक‌ बनाने की पहल समाज की ओर से होनी चाहिए।

आर डी धारणीया, अखिल भारतीय जीव रक्षा पंजाब के प्रदेशाध्यक्ष 


 जाने क्या है अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक की खासियत

जाने क्या है अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक की खासियत


अमर शहीद माता अमृता देवी बिश्नोई की स्मृति में बने स्मारक की ऊंचाई 363 इंच होने के साथ स्मारक परिसर की फुलवारी के बीच 363 खेजड़ी के पेड़ भी लगाए गए। स्मारक निर्माण के समय जोधपुर के खेजड़ली गांव की मिट्टी व खेजड़ी के पौधे आदर्श स्वरुप ले जाये गये थे।

जिससे पार्क में आने वाले सैलानी शहीदों की मिट्टी को नमन कर सके। मेहराना धोरे के इस स्मारक में अमर शहीद 363 शहादों की स्मृति में चौबीसों घंटे ज्योति प्रजवलित भी की जाएगी।

श्री गंगानगर से मलोट जाने वाली जोटी रोड़ पर स्थित मेहराणा धोरा मंदिर के सामने 6 एकड़ में यह पार्क बनाया गया है।

स्मारक पर खेजड़ली गांव में विक्रम संवत 1730 में पर्यावरण रक्षार्थ शहीद हुए 363 लोगों का पूरा परिचय लिखा गया है। यहां पर लाइब्रेरी, म्यूजियम सहित अन्य सुविधाएं भी विकसित को जा रही है। यहां देश को पहली ओपन वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है। जो बिश्नोई बाहुलय क्षेत्र के 20 गांवों के बीच फैली हुई है। जहां करीब 2-3 हजार के करीब वन्यजीव विचरण करते हैं। इनमें तकरीबन आधे से ज्यादा हिरण है।


इतिहास के झरोखों से आइए जाने मेहराणा धोरा धाम के बारे में

मेहराणा धोरा : पंजाब के बिश्नोई बहुल गांवों व समाज का आस्था एवं श्रद्धा का प्रतीक है। सित्तोगुन्नों चौराहे से मलोट की तरफ जाने वाली सड़क पर लगभग 4 किमी चलने पर मेहराणा घोरा रूपी पावन स्थल आता है।

बताया जाता है कि लगभग 80 वर्ष पूर्व यह क्षेत्र अत्यंत बीरान था। लगभग 30 बीघा का इलाका झाड़ झंखाड़ और पेड़ पौधों से ढका रहता था। आसफास गांवों के लोग दिन में भी यहां आने से तक से कतराते थे।

ऐसे समय में सजस्थान की नोखा तहसील के जेगला गांव से बह्मदास जी सिगड़ नामक संत इस स्थान पर आए। इस निर्जन स्थान पर एकांत में हकर तपस्या करने लगे।

आसपास गांवों के लोग तपस्यारत बह्मदास जी के दर्शन एवं भोजन पानी हेतु आने लगे। उन्होंने यहां 30 वर्ष तक तपस्या की। इस अवधि में कोई व्यक्ति वहां रात्रि विश्वाम हेतु नहीं रुक सकता था।

आज उसी स्थान पर गुरु जम्भेश्वर भगवान का भव्य मन्दिर बना हुआ है। मन्दिर के पास ही बह्मदास जी की समाधि व गुफा है। जहाँ उन्होंने तपस्या को थी।

निकट ही बालिकाओं के लिए झमकूदेवी उमा. विद्यालय संचालित है। कुछ समय पूर्व तक स्कूल का संचालन मन्दिर समिति ही करती थी। मन्दिर की वर्तमान में कुल 15 बीघा (लगभग ) जमीन हैं जहां पेड़ पौधे लगे है। मुख द्वार के पास हिरण शिकार प्रकरण में शहीद हुए हजारीरामजी मांझु की प्रतिमा स्थापित है।

अमृता देवी बिश्नोई स्मृति स्मारक के मुख द्वार के पास हिरण शिकार प्रकरण में शहीद हुए हजारीरामजी मांझु की प्रतिमा स्थापित है।




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