सांस्कृतिक परंपरा: वधू द्वारा क्यों की जाती है अनाज की बारिश घी में डुबोई जाती है कनिष्ठ

 सांस्कृतिक परंपरा: वधू द्वारा क्यों की जाती है अनाज की बारिश घी में डुबोई जाती है कनिष्ठ

सांस्कृतिक परंपरा: वधू द्वारा क्यों की जाती है अनाज की बारिश घी में डुबोई जाती है कनिष्ठ
नववधू द्वारा अनाज की बारिश


कुलदीप साहु (अध्यापक), चितलवाना।

कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार के बाद इन दिनों बिश्नोई समाज सहित अन्य समाजों में भी शादी विवाह की सीजन चल रही है। हालांकि अन्य समाजों में देवउठनी एकादशी के बाद ही विवाह शादी प्रारंभ हुए हैं लेकिन हमारे बिश्नोई समाज में गुरु जंभेश्वर भगवान की कृपा से शादी विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं देखा जाता है ऐसे में कभी भी शादी विवाह किया जा सकता है।

 शादी विवाह की सीजन के दौरान सोशल मीडिया पर समाज की अनेक परंपराओं व प्रथाओं के वीडियो व फोटोज बंधुओं द्वारा शेयर किए जा रहे हैं जिसमें हमारे विश्नोई समाज में सबसे ज्यादा घर में नववधू के आगमन पर अनाज की बारिश करने के वीडियो देखे जाते हैं।

वधू द्वारा अनाज की बारिश, चौखट पर वर द्वारा पैरों से नारियल फोड़ना, नव वधू के घर में प्रवेश करने पर रसोई घर में घी में कनिष्ठा (अंगुली) डूबोना, देवर को वधू के गोडे पर बैठाना व बार रोकना आदि इन परंपराओं का निर्वहन क्यों किया जाता है।

इस संबंध में पड़ताल की तो मैंने पाया कि हर रिवाज, परंपरा व प्रथा के पीछे कोई न कोई लॉजिक अवश्य होता है जिनके चलते हम परंपराओं का पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण करते हैं।


क्यों की जाती है अनाज की बारिश


घर में नववधू के आगमन पर घर की चौखट से अंदर आंगन में प्रवेश करते ही वधू के कर कमलों द्वारा पीछे की ओर अनाज (बाजरी) की वर्षा की जाती है। इसके पीछे कारण यह है की लक्ष्मी के रूप में नव वधू के आगमन पर घर में धन, धान, धीणा आदि की कोई किसी प्रकार की कमी नहीं होगी और घर गवाड़ी सुखी, समृद्ध व संपन्न होगी। दीक्षा के दौरान जैन समाज में जिस प्रकार वर्षी दान किया जाता है ठीक उसी तरह यह बारिश की जाती है।

 पीछे की ओर बारिश करने से तात्पर्य यह है कि किसी का चेहरा देखे बगैर बिना किसी भेदभाव के घर-गवाड़ी में समृद्धि आने के भाव होते हैं।


क्यों फोड़ा जाता है चौखट पर नारियल

वर द्वारा वधू को लेकर अपने घर की चौखट पर आने पर मिट्टी की ढकनी के नीचे रखकर नारियल को फोड़ना हमारे समाज की परंपरा रही है। यह नारियल वधू पक्ष के साथ आए ओलिंदो की उपस्थिति में फोड़ा जाता है। इस रस्म को पूर्ण करने में बाकायदा ओलिंदो को बुलाया जाता है तथा उनके हाथ से ही नारियल रखवाया जाता है। पुराने समय में इस नारियल के लिए बहुत मारामारी होती थी क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस नारियल की चिटकी खाने से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है।

 इस नारियल को वर द्वारा पैरों से फोड़ने के पीछे लॉजिक यह है कि घर में रोग-दोष आदि असुरी शक्तियों की वजह से होते हैं ऐसे में पैरों तले आसुरी शक्तियों को रोंदने के लिए इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है।


घी में डुबोई जाती है वधू की अंगुली

नववधू के घर में प्रवेश के बाद सीधे रसोई में ले जाकर हाथ की कनिष्ठा अंगुली को घी में डुबाने की परंपरा भी रही है इस परंपरा का पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण का उद्देश्य वधू का रसोईघर से परिचय कराना होता है। अन्य समाज में दही आदि में अंगूठी को डाला जाता है तथा वर-वधू दोनों द्वारा उसे ढूंढा जाता है जो अंगूठी को पहले ढूंढता है उसको तेज माना जाता है। 


वर वधू को चौखट पर रोकती है बहिन

बधावा गाने के साथ वर-वधू के घर की चौखट पर आने पर बहिन द्वारा उनको रोका जाता है जिसे 'बार रोकना' कहा जाता है इस परंपरा का निर्वहन क्यों किया जाता है इस संबंध में कोई ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई लेकिन वधू का नणद से परिचय कराना ही होता है। वर (भाई) द्वारा बहिन को कुछ गहना या नकद राशि देने पर ही आगे बढ़ने दिया जाता है।

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